Love PoetryPoetryUncategorized

मैं नहीं लिख सकता

मैं नहीं लिख सकता।
मेरी दोस्त,
मैं तुमपर कुछ नहीं लिख सकता।
एक कविता लिखनी चाही थी, मैंने
जिसमें तुम होती, तुम्हारा जिक्र होता।

मगर, कमबख्त शायरों और कवियों ने,
अपनी-अपनी प्रेमिकाओं के लिए ऐसे-ऐसे
क़सीदे, और इतना प्रेम शब्दों में लिख डाला
कि ग़र मैं तुम पर कुछ लिखूं तो
कहोगी कि किस कवि की कविताएं है?
किसके शब्द चुरा लाए आज?

इसीलिए, मेरी दोस्त
मैं अब तुम पर कुछ नहीं लिखूंगा।
क्या लिखूंगा?
तुम्हारी सुंदर झटकदार बालों की तारीफें,
या उन आंखों पर जिसमें मैं खोया रहता हूं।
कवियों ने सबकुछ लिख दिया है,
कमबख्तों ने कुछ ऐसा नहीं छोड़ा
जिसपर न लिखा गया हो।

मेरा प्रेम पहले शब्दों से तेरे लिए झलकता था,
आज वह कॉपीराइट के चक्करों में फंसा है।

इसीलिए, मेरी दोस्त
मैं तुमपर कुछ नहीं लिख सकता।
मुझे माफ कर दो।
मुझे अपनी आंखों में छुपाकर रख लो।
अपने हृदय में जगह दे दो।
ताकि, इन कवियों के तानों से बच सकूं।

Tags

Pradeep Kumar

Founder, Editor-in-chief,Writer and PRO of Apna Gharaunda

Related Articles

Check Also
Close
Back to top button
Close
Close