Poetry

नकाब

सच का नकाब छोड़,
मैंने झूठ का दामन पकड़ लिया।

इस चलती व्यस्त दुनिया में,
एक धूमिल दुनिया तलाश लिया।

तलाश थी,सच पाने की।
सच आधा था,अधूरा रह गया।

यह झूठ है कि मैं झूठ बोलता हूं,
यह सच जो मैं तुमसे कह रहा हूं।

Pradeep Kumar

Founder, Editor-in-chief,Writer and PRO of Apna Gharaunda

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